उत्तराखंड

डेंगू के मच्छर पर एंटी लार्वा का छिड़काव ही ज्यादा असरदार, शोध में पता चला फॉगिंग से डेंगू मच्छर कुछ देर के लिए अचेत हो जाता है, पूरी तरह से मरता नहीं

फॉगिंग में दवा ऊपर ही ऊपर रह जाती है, ऐसे में लार्वा सर्वे करने के साथ ही इसके समूल नाश की जरूरत है

7 सितंबर 2023 उत्तराखंड : राजधानी देहरादून में डेंगू का कहर जारी है । राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान ने एक अध्ययन में यह निष्कर्ष निकला था कि फॉगिंग से डेंगू मच्छर कुछ देर के लिए अचेत हो जाता है, पूरी तरह से मरता नहीं है। इसका असर सिर्फ सामान्य या मलेरिया के कारक क्यूलेक्स मच्छर पर ही होता है। जर्नल ऑफ वेक्टर बॉर्न डिसीज में प्रकाशित दो प्रमुख शोध पत्रों में एडीज मादा से मुकाबले के लिए नए रसायनों के इस्तेमाल की बात कही गई है। अध्ययन में देखा गया कि फॉगिंग की जगह लेटेक्स, मेनेथॉल और बॉरिक एसिड का उपयोग एडीज पर सीधे असर करता है।

यह लार्वा को प्यूपा बनने से पहले ही खत्म कर देता है। एक शोध में पता लगा कि अगर अंडा, लार्वा में नहीं बदला है और तापमान घट गया है तो वह ऐसे ही पड़ा रहेगा। जैसे ही तापमान अनुकूल होगा, वह लार्वा और प्यूपा में बदलकर मच्छर बन जाएगा। ऐसे में आवश्यकता दवा के छिड़काव की है।

फॉगिंग में दवा ऊपर ही ऊपर रह जाती है। ऐसे में लार्वा सर्वे करने के साथ ही इसके समूल नाश की जरूरत है। नगर आयुक्त मनुज गोयल ने बताया कि फॉगिंग के साथ ही अब लार्वा साइडल का छिड़काव किया जा रहा है, जिससे कि लार्वा को मच्छर बनने से रोका जा सके। उन्होंने भी माना कि फॉगिंग से मच्छर मरता नहीं है, कुछ घंटे के लिए निष्क्रिय हो जाता है।

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