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कई और बड़े नेता कांग्रेस से ‘आजाद’ होने की तैयारी में, डैमेज कंट्रोल कर पाने में गांधी परिवार विफल

गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे से सहमी कांग्रेस को अभी और झटके लगने वाले हैं क्योंकि देश के विभिन्न राज्यों में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के इस्तीफों की घोषणा का दौर शुरू हो चुका है। कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर भले कहा है कि आजाद के जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन पार्टी के अंदर इस बात पर चर्चा शुरू हो चुकी है कि किस तरह डैमेज कंट्रोल किया जाये। गांधी परिवार का कोई सदस्य इस समय देश में नहीं है इसलिए पार्टी नेताओं की मुश्किलें और बढ़ गयी हैं। एक तरफ कांग्रेस नेता हालात संभालने की कोशिश कर रहे हैं तो दूसरी ओर गांधी परिवार के समर्थकों और आजाद समर्थक नेताओं के बीच चल रही जुबानी जंग तेज होती जा रही है।

इस बीच, कांग्रेस से इस्तीफा दे चुके वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि वह जल्द ही नयी पार्टी बनाएंगे और उसकी पहली इकाई जम्मू कश्मीर में बनायी जाएगी। आजाद ने कहा है कि ‘‘मैं कोई राष्ट्रीय पार्टी बनाने के लिए अभी जल्दबाजी में नहीं हूं लेकिन जम्मू कश्मीर में चुनाव होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए, मैंने वहां जल्द ही एक इकाई गठित करने का फैसला किया है।’’ आजाद ने साथ ही कहा है कि ‘‘मैंने इस निर्णय के बारे में काफी सोच-विचार किया तथा इसे वापस लेने का कोई सवाल नहीं है।’’ आजाद ने साथ ही अपनी पूर्व पार्टी के उन नेताओं के बयानों पर भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है जो आजाद को धोखेबाज बता रहे हैं।

अब आजाद भले कोई टिप्पणी करें या ना करें लेकिन हम आपको बताते हैं कि हाल में कांग्रेस छोड़ने वाले नेता या पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र कायम करने के लिए आवाज उठा रहे नेता आजाद के इस्तीफे पर क्या कह रहे हैं। सबसे पहले बात करते हैं कैप्टन अमरिंदर सिंह की। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा नेतृत्व में पार्टी का ‘‘उद्धार संभव नहीं है।’’ अमरिंदर सिंह ने एक बयान में कहा, ‘‘जब आप गुलाम नबी आजाद जैसे नेताओं को नहीं रोक सकते, जिन्होंने अपना पूरा जीवन पार्टी के साथ बिता दिया तो आपके तौर-तरीकों और अपने वरिष्ठ तथा अनुभवी नेताओं के साथ बर्ताव करने के तरीके में कुछ तो गड़बड़ है।’’

 

इस साहसिक फैसले के लिए आजाद को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि एक विवेकशील और ईमानदार नेता सिद्धांतों तथा गरिमा से समझौता नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब निहित स्वार्थों वाले कुछ खास लोगों का विशेष समूह है, जिसने दुर्गन्ध फैलाना शुरू कर दिया है।’’ उन्होंने कहा कि समय-समय पर कई सारे तूफानों का सामना करने वाले और पार्टी के साथ खड़े रहे वरिष्ठ नेताओं को पार्टी छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है। अमरिंदर सिंह ने आजाद के खिलाफ कांग्रेस नेताओं के कथित दुर्भावनापूर्ण बयानों की निंदा की। उन्होंने कहा, ‘‘उनके खिलाफ निराधार आरोप लगाने के बजाय आपको आत्मावलोकन करना चाहिए कि पार्टी छोड़ने का यह सिलसिला रुक क्यों नहीं रहा है।’’

 

वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार ने कहा कि कांग्रेस के भीतर घर कर गई कई समस्याओं का समाधान मौजूदा नेतृत्व द्वारा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, ‘‘आजाद के इस्तीफे के बाद अभी और नेता पार्टी छोड़ सकते हैं। इस कारण कांग्रेस अप्रासंगिक हो जाएगी।” उधर, पूर्व कांग्रेस नेता और अब भाजपा में शामिल होकर असम के मुख्यमंत्री बन चुके हिमंत बिस्व सरमा ने कहा है कि कांग्रेस में समस्या यह है कि हर कोई जानता है कि राहुल गांधी ‘‘अपरिपक्व, सनकी और मनमौजी’’ हैं लेकिन उनकी मां अब भी उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। वहीं हाल ही में कांग्रेस छोड़ने वाले जयवीर शेरगिल ने दावा किया है कि वास्तव में कांग्रेस के भीतर ‘कांग्रेस तोड़ो अभियान’ चल रहा है। सही नेताओं को बाहर किया जा रहा है। वहीं हाल ही में कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा है कि यह कांग्रेस के अंत की शुरुआत है। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जी-23 समूह के सदस्य आनंद शर्मा के बारे में भी माना जा रहा है कि वह भी जल्द ही कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर सकते हैं। फिलहाल तो उन्होंने आजाद के इस्तीफे पर आश्चर्य जताया है।

इसके अलावा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा है कि पार्टी के पास ‘‘कठपुतली अध्यक्ष’’ न होकर विधिवत रूप से निर्वाचित अध्यक्ष होना चाहिए। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने इस बात पर अफसोस जताया कि पार्टी ने पिछले 24 वर्षों से संगठनात्मक चुनाव नहीं कराए हैं। उन्होंने कहा कि आजाद पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता और धर्मनिरपेक्ष चेहरा थे। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने भी कहा है कि दो वर्ष पहले हम 23 लोगों ने कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी को पत्र लिखकर बताया था कि कांग्रेस की परिस्थिति चिंताजनक है जिस पर विचार करने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की बगिया को बहुत लोगों, परिवारों ने अपने खून से संजोया है। अगर किसी को कुछ मिला तो वह ख़ैरात में नहीं मिला है। हम आपको बता दें कि मनीष तिवारी का यह बयान कांग्रेस के उन नेताओं पर पलटवार है जो कह रहे हैं कि आजाद कुछ नहीं थे वह आज जो कुछ हैं वह कांग्रेस की बदौलत हैं।

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