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छगन भुजबल, नारायण राणे और राज ठाकरे ने क्यों छोड़ी पार्टी? शिंदे गुट के नेता का दावा- शिवसेना के हर एक विभाजन में शरद पवार का हाथ

शिदें गुट की तरफ से एनसीपी नेता शरद पवार को लेकर बड़ा दावा किया गया है। शिंदे समूह के प्रवक्ता विधायक दीपक केसरकर ने दावा किया है कि शिवसेना के विभाजन के पीछे राकांपा प्रमुख शरद पवार का हाथ था। शिवसेना विधायक और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे धड़े के प्रवक्ता दीपक केसरकर दिल्ली में 18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले एनडीए दलों की बैठक में शामिल हुए। केसरकर ने राकांपा प्रमुख शरद पवार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी शिवसेना का विभाजन हुआ है, विभाजन के पीछे पवार का ही हाथ रहा है। केसरकर ने कहा कि जब छगन भुजबल, नारायण राणे और यहां तक ​​कि राज ठाकरे जैसे नेताओं ने शिवसेना छोड़ी, तो इसके पीछे पवार थे।

केसरकर ने कहा कि शिवसेना के अधिकांश सांसदों ने शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से एनडीए में वापस जाने का आग्रह किया था, यह कहते हुए कि शिंदे गुट तकनीकी रूप से एनडीए में शामिल हो गया था। उन्होंने कहा, ‘जब मैं राकांपा में था तो बहुत कुछ कहा जाता था। पवार की खासियत यह है कि जब भी महाराष्ट्र में शिवसेना का विभाजन हुआ, उसके पीछे पवार का हाथ था। पवार को महाराष्ट्र की जनता को भी जवाब देना चाहिए।’ उन्होंने इस बात की भी जानकारी दी कि एनसीपी किस तरह से राज्य में शिवसेना को खत्म करने की साजिश रच रही है। दिलचस्प बात यह है कि केसरकर ने एक तरफ मौजूदा राजनीति में एनसीपी पर गंभीर आरोप लगाए और शिवसेना में बगावत की राजनीति की बात कही।

केसरकर का एनसीपी पर हमला

स्वाभाविक है कि पवार चाहते हैं कि उनकी पार्टी आगे बढ़े और सत्ता में आए। लेकिन बालासाहेब कभी भी राकांपा की विचारधारा से सहमत नहीं थे। इसलिए आम शिवसैनिक एनसीपी के साथ नहीं जाएंगे। दीपक केसरकर ने कहा कि ऐसे समय में जब महाराष्ट्र में शिवसेना का विभाजन हुआ है, शरद पवार की ही ये विशेषता है। बालासाहेब के जीवित रहते शरद पवार ने शिवसेना को क्यों प्रताड़ित किया? केसरकर ने कहा कि उन्हें इसका जवाब देना चाहिए। शरद पवार अच्छी तरह जानते हैं कि किसी को भी लोगों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

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