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सिर्फ माफी काफी नहीं” : PM का वीडियो हटने पर संसद सख्त, मेटा से कार्रवाई की मांग

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक वीडियो हटने का मामला सिर्फ “एक पोस्ट डिलीट” का नहीं था। इसीलिए सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने मेटा को कड़ी फटकार लगाई।

*1. मामला “तकनीकी गलती” से बड़ा है – संवैधानिक पद से जुड़ा है*
वीडियो प्रधानमंत्री के आधिकारिक अकाउंट से था। उसमें वो पेपर लीक पर युवाओं को संबोधित कर रहे थे। समिति और सरकार का मानना है कि देश के PM का कंटेंट हटना सीधे तौर पर सरकारी संवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा/सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ा है। इसे मामूली बग नहीं माना जा सकता।

*2. जवाबदेही तय करने की मांग*
सांसदों ने कहा – “सिर्फ माफी काफी नहीं”। उनके सवाल थे:
– वीडियो हटाने के लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन है?
– उसके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
– भविष्य में ऐसा दोबारा न हो इसकी क्या गारंटी है?
मतलब कंपनी की इंटरनल प्रोसेस और जवाबदेही पर सवाल उठे।

*3. प्लेटफॉर्म की नीतियों पर भरोसा का मुद्दा*
बैठक में गूगल, यूट्यूब, X, स्नैपचैट के साथ-साथ MHA और MeitY के अधिकारी भी थे। चर्चा का मुख्य विषय था “सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का नियमन”। PM का वीडियो हटना इस बहस का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया कि प्लेटफॉर्म मनमाने तरीके से कंटेंट हटा सकते हैं या नहीं।

*4. पहले भी सरकार ने आपत्ति जताई थी*
इससे कुछ दिन पहले ही केंद्र सरकार ने मेटा की ग्लोबल टीम को तलब किया था। MeitY ने भी मेटा की “तकनीकी गलती” वाली सफाई को अपर्याप्त कहा था। इसलिए जब मामला संसद की समिति में आया तो रुख और सख्त हो गया।

*समिति ने मेटा से क्या पूछा:*
– वीडियो हटाने के लिए जिम्मेदार पर कार्रवाई क्यों नहीं?
– विवादित/आपत्तिजनक कंटेंट पर आपकी पॉलिसी और जवाबदेही क्या है?
– ऐसी गलती दोबारा रोकने के लिए क्या सिस्टम बनाएंगे?

*नतीजा*: मेटा ने गलती मानी और माफी मांगी, वीडियो बहाल भी कर दिया। लेकिन समिति ने साफ कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म भारत के कानून और संवैधानिक पदों का सम्मान करें, वरना सख्त नियमन होगा।

 

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