लेखक गांव की ‘प्रकृति की पाठशाला’ बना उत्तराखंड पर्यटन चिंतन का केंद्र
देहरादून। लेखक गांव स्थित ‘प्रकृति की पाठशाला’ में उत्तराखंडी टूरिज्म रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन (उत्तरा) की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी द्वारा आयोजित मंथन कार्यक्रम में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं लेखक गांव के संस्थापक डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि उत्तराखंड की पर्यटन नीति केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण तथा पर्यटकों को गुणवत्तापूर्ण अनुभव उपलब्ध कराने पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तीर्थाटन और पर्यटन दोनों की अपनी अलग-अलग अवधारणा और महत्ता है तथा इन्हें समझकर ही राज्य के पर्यटन का नियोजन किया जाना चाहिए।
डॉ. निशंक ने कहा कि उत्तराखंड तीर्थ, दर्शन, प्रकृति और सौंदर्य की भूमि है। यहां का तीर्थाटन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि आत्मिक ऊर्जा और जीवन मूल्यों से जुड़ा है, जबकि पर्यटन प्रकृति, संस्कृति और स्थानीय जीवनशैली से जुड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य के पर्यटन स्थलों का विकास उनकी वहन क्षमता को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। पर्यटन का उद्देश्य केवल भीड़ बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक पर्यटक को बेहतर और यादगार अनुभव प्रदान करना होना चाहिए। इसके लिए अधोसंरचना और योजनाओं का विस्तार भी उसी अनुरूप किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने लेखक गांव को साहित्य, संस्कृति और प्रकृति के संगम का केंद्र बताते हुए यहां स्लो टूरिज्म, साहित्य पर्यटन और आध्यात्मिक पर्यटन सर्किट विकसित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक यात्रा मार्गों के पुनर्जीवन के साथ स्लो टूरिज्म स्थानीय संस्कृति, लोक परंपराओं, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए पर्यटन उद्यमियों, होटल व्यवसायियों, ट्रैवल ऑपरेटरों और पर्यटन विशेषज्ञों ने पर्यटन क्षेत्र के विकास तथा संगठनात्मक मजबूती को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। मंथन में ‘उत्तरा’ को उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद से औपचारिक मान्यता दिलाने, परिषद की सलाहकार समिति में संगठन का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने, पर्यटन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले उद्यमियों और नवाचारकर्ताओं को समय-समय पर ‘उत्तरा पर्यटन सम्मान’ प्रदान करने, प्रत्येक जनपद में स्थानीय युवाओं के कौशल विकास के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन का डिजिटल डाटाबेस तैयार करने तथा उसे उपयुक्त पोर्टल पर उपलब्ध कराने पर सहमति बनी। इसके साथ ही लेखक गांव में ‘जिम्मेदार पर्यटन’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित करने तथा राज्य में पर्यटन सर्किट, स्लो टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय समुदाय की सहभागिता पर आधारित पर्यटन मॉडल विकसित करने का निर्णय लिया गया।
‘उत्तरा’ के अध्यक्ष प्रशांत मैठाणी ने संगठन की भावी कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन को केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि स्थानीय समाज, संस्कृति और प्रकृति से जुड़ा जनआंदोलन बनाने की दिशा में संगठन कार्य करेगा। इस अवसर पर उपाध्यक्ष सुनील राणा, सचिव देव पोखरियाल, संयुक्त सचिव मोहित शर्मा एवं अजय कंडारी, कोषाध्यक्ष महेंद्र घिल्डियाल, कार्यकारिणी सदस्य गजेंद्र मेहरा, राकेश पंत, गौरव शर्मा, अल्पेश कुमार सहित प्रदेशभर से आए पर्यटन उद्यमियों ने उत्तराखंड में सतत, जिम्मेदार और रोजगारपरक पर्यटन मॉडल विकसित करने पर अपने विचार रखे।
