उत्तराखंड

लंबे समय से लटकी दाखिल-खारिज की प्रक्रिया शुरू होने से आमजन को मिलेगी राहत

विभाग का ढांचा वर्ष 1952 के अनुसार चल रहा है, लेकिन वर्तमान में काम का दबाव बढ़ गया है

 28 Aug 2023 : तकरीबन 55 दिनों से तहसीलों में बंद पड़े दाखिल-खारिज आज से शुरू होंगे। मुख्यमंत्री की ओर से मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद उत्तराखंड रजिस्ट्रार कानूनगो संघ ने दाखिल-खारिज के बहिष्कार को समाप्त करने का निर्णय लिया है। समय से लटकी दाखिल-खारिज की प्रक्रिया शुरू होने से आमजन को राहत मिलेगी।

सदर तहसील की बात करें तो यहां 8200 से अधिक दाखिल-खारिज अटके हुए हैं। सीमित संसाधन और काम का बोझ बढ़ाने का हवाला देते हुए तीन जुलाई से उत्तराखंड रजिस्ट्रार कानूनगो संघ के आह्वान पर रजिस्ट्रार कानूनगो दाखिल-खारिज से संबंधित प्रक्रिया का बहिष्कार कर रहे थे।

लेखपालों के स्तर से दाखिल-खारिज के लिए फाइल रजिस्ट्रार कानूनगो के पास पहुंच रही थीं, लेकिन बहिष्कार के चलते वह आगे नहीं बढ़ पा रही थीं। तहसील सदर की बात करें तो यहां तकरीबन 150 दाखिल-खारिज प्रतिदिन होते हैं। ऐसे में तकरीबन 55 दिनों में 8200 से अधिक दाखिल-खारिज अटके हैं।

उत्तराखंड रजिस्ट्रार कानूनगो संघ के प्रदेश अध्यक्ष राकेश पल्लव ने बताया कि राजस्व संबंधी कार्यों को आनलाइन कराए जाने से इसके मुताबिक आपरेटर आधी संख्या में हैं। विभाग का ढांचा वर्ष 1952 के अनुसार चल रहा है, लेकिन वर्तमान में काम का दबाव बढ़ गया है। इसी को लेकर कार्य बहिष्कार चल रहा था।

शनिवार देर रात चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से वार्ता हुई। जिसमें उन्होंने मांग पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। उत्तराखंड रजिस्ट्रार कानूनगो संघ के जिलाध्यक्ष प्रमोद कुमार शर्मा ने बताया कि सोमवार से दाखिल-खारिज की प्रक्रिया शुरू होगी।

हर राज्य के पास जमीन या प्रॉपर्टी के समझौते से संबंधित रिकॉर्ड होता है। इस रिकॉर्ड में जमीन के मालिकाना हक के बारे में ब्यौरा दिया जाता है। इसी के साथ इस डॉक्यूमेंट के जरिये आम आदमी की प्रॉपर्टी निवेश को सुरक्षित रखने में मदद करता है। जमीन के रिकॉर्ड की वजह से प्रॉपर्टी से जुड़े फ्रॉड के मामले कम हो जाते हैं।

जब भी आप को खरीदते हैं तब आपको उसकी सारी जानकारी रेवेन्यू रिकॉर्ड में रजिस्टर करना होता है। प्रॉपर्टी म्यूटेशन के जरिये प्रॉपर्टी टैक्स लायबिलिटी की परेशानी भी एक हद तक खत्म हो जाती है। हर राज्य में इसका नाम अलग-अलग होता है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार में उसे दाखिल-खारिज कहा जाता है।

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