उत्तराखंड

यूसीसी के अनुसार लिव-इन में रहने वाले हर व्यक्ति को रजिस्टर्ड वेब पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा अनिवार्य

लिव-इन में पैदा बच्चों को उस युगल का जायज बच्चा माना जाएगा

 धामी सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक मंगलवार को सदन के पटल पर रख दिया है. नए कानून में लिव इन रिलेशनशिप को व्यवस्थित करने के लिए प्रावधान किए गए हैं । नियमों का पालन न होने पर आर्थिक दंड के साथ ही जेल की सजा का प्रावधान भी है  यूसीसी के ड्राफ्ट में लिव इन रिलेशनशिप को विस्तृत रूप से रखा गया है। इसके अनुसार, सिर्फ एक वयस्क पुरुष और वयस्क महिला ही लिव इन रिलेशनशिप में रह सकेंगे। वह भी तब, जबकि यदि वो पहले से विवाहित या किसी दूसरे के साथ लिव इन रिलेशनशिप में नहीं हों। लिव-इन में रहने वाले हर व्यक्ति को अनिवार्य रूप से एक रजिस्टर्ड वेब पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद उसे रजिस्ट्रार कार्यालय से पंजीकरण की रसीद दी जाएगी। उसी रसीद के आधार पर वह युगल किराये पर घर या हॉस्टल या फिर पीजी ले सकते हैं।

शर्तें● पंजीकरण वाले युगल की सूचना रजिस्ट्रार को उनके माता-पिता या अभिभावक को देनी होगी।

● लिव-इन में पैदा बच्चों को उस युगल का जायज बच्चा माना जाएगा।
● उसे जैविक संतान जैसे समस्त अधिकार भी प्राप्त होंगे।
● लिव-इन में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को संबंध विच्छेद का पंजीकरण कराना भी अनिवार्य ।

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