उत्तराखंड

नए साल में शिफ्ट होगा 120 साल पुराना आढ़त बाजार, टेंडर प्रक्रिया शुरू

नए स्थल पर आढ़त बाजार को शिफ्ट करने के लिए करीब 145 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं

मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने आढ़त बाजार की शिफ्टिंग की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए हैं. नए स्थल पर आढ़त बाजार के विकास के लिए एमडीडीए ने टेंडर आमंत्रित कर दिए हैं.ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 के सफल संचालन के बाद एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने आढ़त बाजार की शिफ्टिंग का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है. नए स्थल पर आढ़त बाजार को शिफ्ट करने के लिए करीब 145 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं. आढ़त बाजार शिफ्ट होने से उम्मीद है कि देहरादून शहर के जाम का एक बड़ा मसला हल हो जाएगा.नएआढ़त बाजार के लिए दुकानों का आकार तय कर लिया गया है.15 वर्ग मीटर की 15 दुकानें बनाई जाएंगी. 20 वर्ग मीटर की 07 दुकानें बनेंगी. 25 वर्ग मीटर की 33 दुकानें और 60 वर्ग मीटर की 110 दुकानें बनाना तय हुआ है. 120 वर्ग मीटर की 115 दुकानें बनेंगी तो 150 वर्ग मीटर की 60 दुकानें निर्मित की जाएगीं. इसके साथ ही 95 वर्ग मीटर की एक दुकान और 3162 वर्ग मीटर की एक दुकान भी रहेगी. आढ़त बाजार मेंफायर स्टेशन, पेट्रोल पंप, कोल्ड स्टोरेज, कमर्सियल स्पेस, पॉलीक्लिनिक और गेस्ट हाउस की सुविधा रहेगी. इसके साथ ही वहां पार्किंग का इंतजाम भी होगा. ट्रक पार्किंग के लिए 11 वाहन की क्षमता, कार पार्किंग के लिए 600 वाहन क्षमता, सामान्य स्पेस 28, मल्टीलेवल पार्किंग 572 और दोपहिया पार्किंग की लिए 500 वाहनों की क्षमता रहेगी.मुख्य शहर की भीड़ से दूर हरिद्वार बाईपास के पास पटेल नगर थाने के पीछे आढ़त बाजार को शिफ्ट किया जाना है. कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी थी. आढ़त बाजार विस्थापन में व्यापारियों को प्लॉटों के बदले कोई कीमत अदा नहीं करनी होगी. व्यापारियों की अधिग्रहित भूमि के बदले दोगुनी कीमत के प्लॉट नई बाजार में दिए किए जाएंगे. यह बाजार 7.7493 हेक्टेयर भूमि पर बनना है. व्यापारियों को प्लाटों की रजिस्ट्री के लिए स्टांप शुल्क और डेवलपमेंट चार्ज का खर्च उठाना होगा. आवश्यकता के अनुसार व्यावसायिक नक्शा बनवाकर एमडीडीए से पास भी करवाना होगा.व्यापारियों का कहना है कि आढ़त बाजार करीब 120 साल पुराना है. यहां पर उनकी तीसरी और चौथी पीढ़ियां काम कर रही हैं. आढ़त बाजार में 150 के करीब व्यापारी हैं. प्रोजेक्ट टेंडर की प्रक्रिया पिछले 20 साल से लंबित थी. अब व्यापारियों को व्यापार करना मुश्किल हो गया था. क्योंकि सहारनपुर चौक से लेकर प्रिंस चौक तक बॉटलनेक होने के कारण जाम की स्थिति बनती है. काम ठप हो गया था. यहां का सभी काम हरिद्वार और ऋषिकेश में चला गया है. दुकानों पर होने वाली लोडिंग और अनलोडिंग पर पुलिस द्वारा चालान की कार्रवाई की जा रही है. वर्तमान में व्यापारियों का व्यापार बहुत कम हो गया है. दुकानों में आने वाले व्यापारी अब दूसरे जनपदों में जा रहे हैं. अब जिस तरह से बाजार शिफ्ट किया जा रहा है, तो व्यापारियों को उम्मीद है की सभी का व्यापार पहले की तरह चलेगा. साथ ही बताया कि दुकानें मिलने के बाद व्यापारियों की जरूरत खत्म हो जाएगी. कुछ किरायेदार मुआवजा मांग रहे हैं, लेकिन यह समस्या भी खत्म कर दी जाएगी.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी चाहते हैं कि शहर के इस सबसे बड़े बाटलनेक को शीघ्र व्यवस्थित और पूरी प्लानिंग के साथ दूर किया जाए. इसके लिए आढ़त बाजार को नए स्थल पर शिफ्ट करने के साथ ही सहारनपुर चौक से लेकर तहसील चौक तक सड़क के 1.55 किलोमीटर भाग को 24 मीटर तक चौड़ा किया जाना है. ताकि जाम की समस्या को दूर किया जा सके. एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के मुताबिक आढ़त बाजार की शिफ्टिंग के लिए जिला प्रशासन के साथ मिलकर प्रतिष्ठानों का सर्वे कराया गया था. योजना के तहत आढ़त बाजार शिफ्टिंग में 55 भवन आढ़तियों से संबंधित, जबकि 301 भवन सड़क चौड़ीकरण में आंशिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं. साथ ही नया आढ़त बाजार जल्द से जल्द बनवाने का लक्ष्य है. छह महीने के अंदर इस काम को पूरा कर जाएगा ताकि आढ़त कारोबारियों को समय से दुकानें दी जा सकें.नया आढ़त बाजार बनने के बाद पुराने आढ़त बाजार को शिफ्ट कर दिया जाएगा. उसके बाद सहारनपुर चौक से लेकर प्रिंस चौक तक के क्षेत्र को वाहनों के जाम से छुटकारा मिल सकेगा. इससे देहरादून शहर का ट्रैफिक स्मूथ चल सकेगा.

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