उत्तराखंड

उत्तराखंड में  चौथे दिन भी बारिश और बर्फबारी का दौर जारी

मौसम का जो मिजाज देखने को मिल रहा है। उसे देखते हुए थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। घर से बाहर जब भी निकलें पूरी तरह गर्म कपड़े पहनने के साथ ही ठंडक से बचने का पूरा इंतजाम करें।

उत्तराखंड में  चौथे दिन भी बारिश और बर्फबारी का दौर जारी है। जहां एक ओर रात भर बारिश के बाद देहरादून में धूप और बादलों की छुकाछिपी जारी रही तो वहीं मसूरी के लालटिब्बा में हिमपात हुआ। लेकिन मसूरी शहर में बर्फ नहीं टिकी। फिलहाल यहां बारिश रुकी हुई है। चकराता, धनोल्टी, चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी की ऊंची चोटियों पर भी बर्फबारी का दौर जारी रहा।

वहीं मसूरी-देहरादून मार्ग गलोगी के पास सोमवार को मलबा और बोल्डर गिरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। यहां रुक-रुककर पत्थरों गिर रहे हैं, जिससे मार्ग पर चलना खतरनाक हो गया है। हालांकि बाद में लोक निर्माण विभाग ने जेसीबी लगाकर सड़क यातायात बहाल किया। यहां जेसीबी मशीन तैनात की गई है।

बड़कोट में रविवार रातभर बारिश के चलते यमुनोत्री हाईवे ब्रहमखाल में मलबा आने से अवरुद्ध है। सड़क खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। गंगोत्री हाईवे भी बर्फबारी की वजह से बंद पड़ा हुआ है। कोटद्वार-दुगड्डा के बीच नेशनल हाईवे बारिश की वजह बेहत खराब हालत में है। यहां यातायात फिलहाल बंद है।

चमोली जनपद में सोमवार को भी बारिश और बर्फबारी का दौर जारी रहा। बदरीनाथ धाम में करीब चार फीट और हेमकुंड साहिब में पांच फीट तक बर्फ जम गई है। इसके अलावा रुद्रनाथ, लाल माटी, नंदा घुंघटी, फूलों की घाटी, गौरसों बुग्याल, औली, सहित नीती और माणा घाटी में जमकर बर्फबारी हुई। जनपद में 80 से अधिक गांव बर्फ से ढक गए हैं। पैदल रास्तों में कई फीट बर्फ जम जाने से ग्रामीणों के सम्मुख आवाजाही का संकट भी गहरा गया है।

अत्यधिक ठंड के कारण ग्रामीण पानी को गरम कर पी रहे हैं। खेतों में चारों ओर बर्फ जम जाने के कारण ग्रामीणों को अपने मवेशियों के लिए चारापत्ती का इंतजाम करना भी मुश्किल हो गया है। जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों के गांव पाणा, ईराणी, डुमक, कलगोठ, रामणी, मोहनखाल, नैल, नौली, कलसिर, नागनाथ सहित 80 से अधिक गांव बर्फ से ढक गए हैं। जोशीमठ, गोपेश्वर, पोखरी, घाट, नंदप्रयाग, पीपलकोटी क्षेत्र में लोगों को शीतलहर के प्रकोप का सामना करना पड़ा। बर्फबारी से बदरीनाथ हाईवे, जोशीमठ-औली और गोपेश्वर-चोपता-ऊखीमठ हाईवे अवरुद्ध हो गया है।

रुद्रप्रयाग जनपद में बर्फबारी, बारिश से जनजीवन व्यापक रूप से प्रभावित हो गया है। केदारनाथ में चार फीट तक बर्फ जम चुकी है। मद्महेश्वर, तुंगनाथ, चोपता सहित ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी जमकर बर्फबारी हुई है। जिले में बर्फबारी से 50 से अधिक गांवों में लोगों की दिनचर्या पर असर पड़ा है। सोमवार केदारनाथ में तेज बर्फबारी हुई, जिससे वहां लगभग चार फीट से अधिक नई बर्फ जम गई है। धाम में पहले से ढाई फीट बर्फ मौजूद है।

द्वितीय केदार मद्महेश्वर, तृतीय केदार तुंगनाथ, चंद्रशिला, पर्यटक स्थल चोपता, हरियाली कांठा, देवरियाताल में भी तीन से चार फीट बर्फ गिर चुकी है। खराब मौसम के कारण जिले में त्रियुगीनारायण, तोषी, गौंडार, चिलौंड, चौमासी, जाल मल्ला व तल्ला, कुणजेठी, सारी, घिमतोली, जामू, रविग्राम, गौरी गांव सहित 50 गांवों से अधिक गांवों में दिनचर्या पर व्यापक असर पड़ा है। बर्फ से प्रभावित गांवों में पशुपालकों के सामने अपने मवेशियों के लिए चारापत्ती जुटाना सबसे बड़ी चुनौती बना है। दूसरी तरफ रुद्रप्रयाग व चमोली जनपद के गांवों को जोड़ने वाला कुंड-ऊखीमठ-चोपता-गोपेश्वर हाईवे भी दुगलबिट्टा से आगे भारी बर्फ के कारण बंद हो गया है।

यमुनोत्रीधाम सहित यमुनाघाटी में कुछ घंटों तक बारिश बर्फबारी थमने के बाद पुन देर रात से भारी बारिश और बर्फबारी हो रही है, जिससे यमुनोत्री हाईवे जगह-जगह बाधित होने से आवाजाही ठप्प है। लोग घरों में कैद हैं।

लोग ठंड से बचने के लिए अलाव और अंगीठी का सहारा ले रहे हैं। मौसम के बदलते मिजाज से गनीमत रही है कि रविवार दोपहर बाद मौसम साफ रहते जानकीचट्टी में दो दिन से फंसे आठ पर्यटक सुरक्षित अपने घरों की ओर निकल पड़े हैं।

यमुनोत्रीघाटी में मां यमुना के पुजारी प्यारेलाल उनियाल ने बताया कि खरशाली गांव में करीब एक फिट बर्फ गिर गई है और अभी भी बर्फबारी जारी है। यमुनोत्री धाम में ढाई फिट से अधिक बर्फ जम गई है। इधर सर बडियार के आठ गांव और ठकराल पट्टी के पांच गांव भी भारी हिमपात की चपेट में हैं। बारिश की वजह से श्रीनगर क्षेत्र में बीएसएनएल की संचार सेवा ठप है।

बर्फबारी के कारण पिंडरघाटी के गुमड़, हरिनगर लेटाल, कलचूना, गेरूड़, रूईसाण, घिनपाणी सहित 30 से अधिक गांव बर्फ में कैद हैं। इन गांवों में एक-एक फुट बर्फ जमी है। शुक्रवार शाम से हो रही बारिश और बर्फबारी सोमवार को भी जारी रही, जिससे छह हजार फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बर्फबारी से हरिनगर लेटाल, कलचूना, तैलाण, प्रांत, रतगांव कोलपुड़ी में कई प्राकृतिक स्रोत जमने से क्षेत्रों में पेयजल किल्लत हो गई है।

साथ ही पशुपालकों को पशुओं के लिए चारे और पानी की किल्लत हो गई है।वहीं आदिबदरी क्षेत्र के सिलपाटा, डोल्टू, प्यूंरा, लंगटाईं, पज्यांणा, पंडाव, डांडा-मज्याड़ी, पिंडवाली गांव बर्फ से ढक गए हैं। जंगलचट्टी व दिवालीखाल में भी भारी बर्फबारी हुई है। कर्णप्रयाग, सिमली, आदिबदरी से बड़ी संख्या में लोग बर्फबारी देखने पहुंच रहे हैं। वहीं गैरसैंण के ऊंचाई वाले इलाकों दूधातोली, पैंसर, पनछुया और अंज्ञारी महादेव में भी हिमपात हुआ है।

पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के राज्य के मैदानी व पर्वतीय इलाकों मेें पिछले 24 घंटे से जबरदस्त बारिश हो रही है। मौसम के बदले मिजाज की वजह से राज्य के कुमाऊं व गढ़वाल के ऊंचाई वाले इलाकों में जबरदस्त बर्फबारी भी हुई। राजधानी दून व आसपास के इलाकों में शनिवार देर रात से पूरी रात बारिश होने के साथ रविवार दिनभर बारिश हुई।
मौसम विज्ञानियों का मानना है कि पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने की वजह से अगले 24 घंटे के भीतर मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। सोमवार को राज्य के पर्वतीय इलाकों में हल्की बारिश की संभावना है। राजधानी दून मेें आसमान में हल्के बादल छाए रहेंगे। कहीं-कहीं बहुत हल्की बारिश भी होगी।

सोमवार को राजधानी दून व आसपास के इलाकों में दिन का अधिकतम तापमान 21 डिग्री और न्यूनतम तापमान नौ डिग्री रहेगा। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह के मुताबिक सोमवार को मौसम का मिजाज बदलने से थोड़ी राहत मिलेगी। राज्य के पर्वतीय इलाकों में कहीं-कहीं हल्की बारिश के साथ बर्फबारी की संभावना है।

दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एवं वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. केसी पंत का कहना है कि मौसम का जो मिजाज देखने को मिल रहा है। उसे देखते हुए थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। घर से बाहर जब भी निकलें पूरी तरह गर्म कपड़े पहनने के साथ ही ठंडक से बचने का पूरा इंतजाम करें। जबरदस्त ठंडक से सर्दी, जुखाम, बुखार के साथ ही माइग्रेन का खतरा रहता है।

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