रुद्रप्रयाग, 27 अक्टूबर। उत्तराखंड के पारंपरिक मोटे अनाजों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। राजकीय इंटर कॉलेज जवाहर नगर, मयकोटी में आयोजित छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन हो गया। रिपब्लिक फाउंडेशन सोसाइटी, उत्तराखंड और उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट), देहरादून के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में छात्र-छात्राओं और महिला समूहों को मोटे अनाजों के वैज्ञानिक प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन की जानकारी दी गई। समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के पारंपरिक अनाजों, विशेषकर मंडुवा और झंगोरा, को आधुनिक तकनीक एवं उद्यमिता से जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित करना रहा। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि मोटे अनाज पोषण के महत्वपूर्ण स्रोत होने के साथ-साथ उत्तराखंड की कृषि विरासत और सांस्कृतिक पहचान का भी अभिन्न हिस्सा हैं।
वैज्ञानिक प्रसंस्करण से बढ़ेगी स्थानीय उत्पादों की मांग
कार्यशाला में स्थानीय कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और उन्हें बड़े बाजारों तक पहुंचाने के विभिन्न तरीकों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि उचित प्रसंस्करण, आकर्षक पैकेजिंग, प्रभावी ब्रांडिंग और गुणवत्ता मानकों का पालन करके मंडुवा एवं झंगोरा जैसे पारंपरिक अनाजों को बाजार में बेहतर पहचान दिलाई जा सकती है।
इन प्रयासों से किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय युवाओं को अपने उत्पादों का मूल्य बढ़ाने तथा छोटे उद्यम स्थापित करने के अवसर मिल सकते हैं। इससे स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग होने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
स्थानीय संसाधनों से रोजगार सृजन पर जोर
कार्यक्रम की आयोजन सचिव डॉ. सचि नेगी ने कहा कि स्थानीय संसाधनों पर आधारित कौशल प्रशिक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक मोटे अनाजों को आधुनिक प्रसंस्करण तकनीक, गुणवत्ता मानकों और बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करके व्यापक पहचान दिलाई जा सकती है।
उन्होंने पारंपरिक कृषि ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय को पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण बताया। साथ ही कहा कि स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण, गुणवत्ता में सुधार और प्रभावी विपणन व्यवस्था पर ध्यान देना आवश्यक है। इससे विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल सकती है।
प्रमाण पत्र वितरण से प्रतिभागियों का बढ़ा उत्साह
छह दिवसीय कार्यशाला के समापन पर छात्र-छात्राओं और महिला समूहों के सदस्यों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस दौरान प्रतिभागियों को प्रशिक्षण से प्राप्त जानकारी का उपयोग स्थानीय कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और स्वरोजगार के क्षेत्र में करने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि पारंपरिक अनाजों को केवल घरेलू उपयोग तक सीमित रखने के बजाय उन्हें बाजार की मांग के अनुरूप तैयार कर आय के बेहतर स्रोत के रूप में विकसित किया जा सकता है।
महिला एवं युवा सशक्तीकरण की दिशा में पहल
रिपब्लिक फाउंडेशन सोसाइटी और यूकॉस्ट की संयुक्त पहल का उद्देश्य केदारनाथ हिमालय क्षेत्र की पारंपरिक कृषि विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाना है। इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम महिला समूहों, युवाओं और किसानों को स्वरोजगार के प्रति प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मोटे अनाजों के वैज्ञानिक प्रसंस्करण, गुणवत्ता सुधार और प्रभावी विपणन को बढ़ावा देकर पर्वतीय क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्यमों के विकास की संभावनाएं मजबूत की जा सकती हैं। इससे स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार को बढ़ावा मिलने के साथ आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त हो सकता है।
