“मनरेगा गरीब की जीवनरेखा है” — आर्येन्द्र शर्मा का केंद्र सरकार पर तीखा वार
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष श्री आर्येन्द्र शर्मा ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलने की संभावित प्रक्रिया को “गरीब‑विरोधी और दुर्भावनापूर्ण कदम” बताया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि करोड़ों गरीब, श्रमिक, किसान और भूमिहीन परिवारों के लिए सम्मान, रोज़गार और संवैधानिक अधिकार का प्रतीक है।
शर्मा ने कहा कि महामारी के दौरान जब लाखों मजदूर शहरों से पैदल अपने गांव लौट रहे थे, तब मनरेगा ही उनकी आखिरी उम्मीद बनी थी। ऐसे में इस योजना के नाम में बदलाव की कोशिश उन मेहनतकश हाथों पर प्रहार है, जिन्होंने देश की नींव रखी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने पहली बार ग्रामीण भारत को रोजगार की गारंटी का अधिकार दिया था, लेकिन नए प्रावधानों के जरिए भाजपा सरकार ने रोजगार की बाध्यता, भुगतान की समयसीमा और मजदूरों के अधिकारों को कमजोर कर दिया है। उनके अनुसार, इससे योजना अधिकार आधारित न होकर “मजबूरी और दया” पर आधारित व्यवस्था में बदल जाएगी।
शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार शुरू से ही मनरेगा को कमजोर करने की कोशिश कर रही है—कभी इसे “खाई खोदने वाला काम” कहकर, तो कभी बजट में कटौती कर। उन्होंने कहा कि मजदूरी भुगतान में देरी से गरीब परिवार कर्ज में डूबे और अब नाम बदलने की कोशिश कांग्रेस की ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय छीनने का प्रयास है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार नाम बदलने, धार्मिक ध्रुवीकरण और प्रतीकात्मक राजनीति में उलझी है, जबकि बेरोज़गारी, पलायन, महंगाई और ग्रामीण संकट जैसे मुद्दे उपेक्षित हैं। शर्मा ने कहा कि सरकार को मनरेगा का बजट बढ़ाना चाहिए था और कार्यदिवस 100 से बढ़ाकर 150 या 200 करने चाहिए थे, लेकिन इसके विपरीत गरीबों की जीवनरेखा कमजोर की जा रही है।
उत्तराखंड के संदर्भ में उन्होंने कहा कि मनरेगा ने पर्वतीय क्षेत्रों में हजारों परिवारों को आर्थिक आधार दिया है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित रोजगार अवसरों के बीच इस योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संभाला, आधारभूत ढांचा तैयार किया और आपदाओं के बाद गांवों को पुनर्स्थापित करने में मदद की। उनके अनुसार, योजना में छेड़छाड़ पर्वतीय जीवन को और कठिन बना देगी।
शर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस कदम का विरोध करेगी और जरूरत पड़ने पर प्रदेशव्यापी जन आंदोलन भी खड़ा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा गरीबों का अधिकार है, जिसे न नाम बदलकर मिटाया जा सकता है और न बजट घटाकर खत्म किया जा सकता है।
इस दौरान अमित पंवार, संजय कुमार, अशोक नेगी, हरीश बिष्ट, संजीव उपाध्याय सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
